क्या हुआ गर आँख उसकी नम नहीं ?

सुराही क्या हुआ गर आँख उसकी नम नहीं ?यह पुरानी याद का मौसम नहींदूर तक हो फूल नज़रेयारमेंक्या हुआ गर गुलशनोमें हम नहीं ?उन लबों पर वस्ल की हो सुर्खियाँआशिकोंकी मौत का मातम नहींदर्द उतना दो जिसे मैं सह सकूँआदमी हूँ; देवता, बरहम नहींऔर तोहफ़ा क्या उसे मैं दूँ,... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[24 Nov 2009 10:48 AM]

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