रातभर जल रहा था परवाना
रातभर जल रहा था परवानाक्यों न उजलेगी मेहफ़िलेजाना ?चँद घडियाँ हैं दिल लगाने कीउम्रभरका है दिल को समझानाइश्क़ शामिल है क्या गुनाहोंमें ?क्यों कफ़स़ जैसा है सनमखाना ?आँख तो नम है इक ज़मानेसेबात कल की है, आपने जानासूख जाये ना प्यासमें आँखेंग़मसे भर देना एक...
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मिलिंद / Milind
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[19 Dec 2009 00:27 AM]



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