बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?

सुराही बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?हुस्न करता इश्कसे, देखें, किनारा कब तलकहमनवा बन जाइएगा, झूमने मेहफ़िल लगेमैं बजाऊँ साजेदिलका एकतारा कब तलक ?दो हिमाला का पता या फिर पता दो यार कादरबदर फिरता रहूँगा बेसाहारा कब तलक ?छुप न पाये चाँद-तारें शाम के होते जवाँइस... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[08 Dec 2009 06:27 AM]

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