जवाँ आशिकोंके दिलोंसा शहर है
जवाँ आशिकोंके दिलोंसा नगर हैसुकूँ है कहीं तो कहीं पर गदर हैकहाँ जा रहा हूँ, कहाँ तक सफर है ?कहीं पर है मंज़िल, कहीं रहगुजर हैयहाँ आ गया जो, न फिर लौट पायाबडा बेरहम यह तिलिस्मी नगर हैकिसी रोज साकी करेगा इनायतअभी जाम खाली हमारी नज़र हैजिये जा रहें सब, पिये...
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मिलिंद / Milind
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[21 Jan 2010 19:49 PM]



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