राह चलते हमकदम मिलता नहीं

सुराही   राह चलते हमकदम मिलता नहीं चाहनेसे साज़ेदिल छिडता नहींराह जाती हो न चिडियाघर कहींदूर तक इक आदमी दिखता नहींमरघटोंसे है गया-गुज़रा शहरधूम क्या, मातम यहाँ मचता नहींचश्मनम तो सूख जाती है मगरक्या बला है खूनेदिल, थमता नहींएक मुद्दतसे नहीं कोई मिलाऔर... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[19 Jan 2010 10:38 AM]

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