खबर थी कि अपनी अलग राह चुनते

सुराही खबर थी कि अपनी अलग राह चुनतेकदम दो कदम तो मगर साथ चलतेनज़र ना चुराओ, तुम्हारी निगाहेंबदल जातीं है इक पलक के झपकतेअभी दाग दामनपर आया नहीं हैचुनरिया रही सर सरकते सरकतेबडी सख्त है जान हम पापियोंकीगुजरती है सदियाँ निकलते निकलतेतुम्हारे महल हो; हमारी हैं... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[27 Jan 2010 10:39 AM]

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