बस्तियोंके दीप क्यों बुझने लगे हैं ?
बस्तियोंके दीप क्यों बुझने लगे हैं ?रोशनीसे लोग क्या डरने लगे हैं ? और कुछ जमहूरियत देगी, न देगीख्व्वाब के बाज़ार तो सजने लगे हैंमंज़िलें अपनी जगह कायम हैं लेकिनरास्तें मुडते हुए दिखने लगे हैंरहनुमाओं ने कहाँ लाया हैं हमको ?लोग उलटे पाँव क्यों चलने लगे हैं...
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मिलिंद / Milind
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[31 Jan 2010 00:42 AM]



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