ज़रा नज़रें झुकाकर बात करते, बात बन जाती
ज़रा नज़रें झुकाकर बात करते, बात बन जातीन था मुमकिन तो बस दीदार करते, बात बन जातीरिवाज़ोरस्मेदुनिया के बहाने कब तलक दोगे ?कभी दुनिया को भी नाराज़ करते, बात बन जातीज़माने की नज़र दिनरात है हमपर, चलो मानाकभी ख्व्वाबोंको ही गुलज़ार करते, बात बन जातीघनेरे बादलोमें...
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मिलिंद / Milind
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[09 Feb 2010 02:11 AM]



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