टुकडे टुकडे हैं जमीनोआसमाँ तनहा

सुराही टुकडे टुकडे हैं जमीनोआसमाँ तनहाहर नगरकी हर गलीका हर मकाँ तनहा  बटते बटते बट चुका है आदमी इतनाज़िस्मसे होकर अलहदा आज जाँ तनहाजब सवालेज़िंदगी हैं मुख्तलिफ़ सबकेहर किसे देना पडेगा इम्तहाँ तनहाहमखयालोहमनवा मिलता नहीं सबकोहालेदिल शायर करे अक्सर बयाँ... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[19 Feb 2010 01:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix