कई सदियोंसे बैठे हम खुशी की राह तकतें हैं
कई सदियोंसे बैठे हम खुशी की राह तकतें हैंबिताने को शबेफुरकत ग़मोंके जाम चखतें हैंखुली आँखोंसे हम पूजा किसीकी कर नहीं सकतेंपुराने मंदिरोंके बुत ज़रा टुटेसे लगतें हैंबडा आसान होता है किसीसे प्यार कर लेनाहमें देखो, यही गलती हज़ारों बार करतें हैंतुम्हारी शानमें...
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मिलिंद / Milind
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[22 Feb 2010 02:11 AM]



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