जब भी मिली, मिलकर गलें, बोली उदासी
जब भी मिली, मिलकर गलें, बोली उदासी"बिछडे हुए दो दिल मिलें", बोली उदासीअपने वफादारोंमें लिख लो नाम मेराक्यों हममें तुममें फासलें, बोली उदासीअपने भी कुछ अरमान हैं, कुछ ख़्वाब रंगींअपनें भी घर फूले-फलें, बोली उदासीकोई नहीं है हमसफर, साथी हमाराखुशियों के...
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मिलिंद / Milind
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[10 Mar 2010 05:09 AM]



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