मरकर सही, दिल को ज़रा आराम आया
मरकर सही, दिल को ज़रा आराम आयाइन्कार भी , उनका, चलो , कुछ काम आया उनकी गली की ख़ाक भी कहने लगी हैफिरसे मुहल्ले में वही बदनाम आयासो ले ज़रा हम ओढकर चादर कफन कीयारो, अभी उनका कहाँ पैग़ाम आया ?या रब, तुझी को ढूँढने घर से चले थेहरसूँ किसी काफ़िर सनम का...
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मिलिंद / Milind
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[14 Mar 2010 10:14 AM]



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