मत जुबाँ सी, अरे ‘श्याम’ तू

gazal k bahane दर्द दिल में है पर मुस्करासाँस खुलकर ले और खिलखिलाकर्ज तेरा है तू ही चुकासर मगर अपना तू मत झुकाहाँ गिले-शिकवे होंगे सदातोड़ मत प्यार का सिलसिलागर नहीं दम कि सच कह सकेबैठ तू बन कर इक झुनझुना मत जुबाँ सी, अरे ‘श्याम’ तूचोट खाई है तो... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[15 Mar 2010 12:53 PM]

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