क्षमा प्रार्थना…
हे मूषक राज, बहुत भारी मन से आपको विदा कर रहा हूँ। आपको कष्ट देने का मेरा कोई इरादा नहीं था। लेकिन क्या करूँ, आपने हमारे परिवार को ऐसा मानसिक कष्ट दिया कि आपको अपने घर से दूर कर देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। आपसे विनती करने का कोई माध्यम...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
चूहा
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[15 Mar 2010 12:50 PM]



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