सिर्फ एक कौवा

जनपद अरविंद चतुर्वेदसिर्फ एक कौवाक्रां-क्रां करताकबसे मुंडेर पर बैठाबड़े गुस्से में चोंच से खुरच रहा है धूपबुद्धू कहीं के!छाया में बैठी जीभ चाटती बिल्लीहैरान है- धूप क्या कोई चमकौवा कागज की पन्नीया चांदी की पत्तर हैजो खुरचने से छूट जाएगी?खुद में परेशान... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[15 Mar 2010 12:02 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix