होली के दोहे

deehwara ___________________फिर फगुनाई धूप ने, छेड़े मन के तारप्रणय निवेदन कर रहा, बूढ़ा हरसिंगार.तेरी चूनर रंग गयी, मेरी भी तू रंगफिर दोनों मिल घोटेंगे, कबिरा वाली भंग.फिर अलसाई सांझ ने,... [पूरी पोस्ट]
writer prkant
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[25 Feb 2010 13:08 PM]

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