कुछ फुटकर
_____________________करके तिरछे नयन तुमने देखा मुझेएक अजानी चुभन तुमने देखा मुझेदेह की देहरी से निकल आया कलसांझ का दीप मन तुमने देखा मुझे.गंध ने पुष्प की पाँखुरी पर लिखाहोंठ ने बांस की बांसुरी पर लिखाकल वही गीत...
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prkant
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[27 Feb 2010 23:18 PM]



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