विदाई की रात
आज तुमने रख लिया अपना सब सामान कपडे-लत्ते , रूमाल जाने को ससुराल.कल सुबह की ट्रेन और रात अभी बाकी हैनींद नहीं आँखों मेंआंसू से डब-डबतैरते हैं दिन-महीने-साल.सुड़कती हो नाक सोचती हो जानेंगे जुकाम,जानती नहीं, हज़ार मुंह हैं...
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prkant
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[06 Mar 2010 12:42 PM]



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