फागुन की सांझ
दीप जला दीवट पर होंठ लगी बांसुरी चौखट पर बैठ गयी फागुन की साँझ री. मन की तरंग उठी तन के सितार में मैना उदास हुई...
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prkant
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[06 Mar 2010 13:11 PM]



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