तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..
मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल हैतब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान मेंलेकिन नज़र में और की खामी है भूल है तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है.....कश्ती का नाखुदा भी हुआ कितना बदगुमानखुद...
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RaniVishal
काव्य तरंग
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[15 Mar 2010 10:45 AM]



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