नवगीत: बजा बाँसुरी ---संजीव 'सलिल'
*बजा बाँसुरीझूम-झूम मन...*जंगल-जंगलगमक रहा है.महुआ फूलामहक रहा है.बौराया हैआम दशहरी-पिक कूकी, चितचहक रहा है.डगर-डगर परछाया फागुन...*पियराई सरसोंजवान है.मनसिज तानेशर-कमान है.दिनकर छेड़ेउषा लजाई-प्रेम-साक्षीचुप मचान है.बैरन पायलकरती गायन...*रतिपति बिन...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[15 Mar 2010 10:59 AM]



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