सलिल के हाइकु
सलिल के हाइकुआया वसंत,इन्द्रधनुषी हुएदिशा-दिगंत..*शोभा अनंतहुए मोहित, सुरमानव संत..*प्रीत के गीतगुनगुनाती धूपबनालो मीत.*जलाते दिएएक-दूजे के लिएकामिनी-कंत..*पीताभी पर्णसंभावित जननीजैसे विवर्ण..*हो हरियालीमिलेगी खुशहालीहोगे श्रीमंत..*चूमता कलीमधुकर...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
acharya sanjiv 'salil'
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[15 Mar 2010 10:23 AM]



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