क्षणिकाएँ

दिल से (१) उधर मत देना मुझे खुशियाँ और सुखमैं पहले ही बहुत कर्जदार हूँ !(२)गंगा में डुबकी लगायी पापों से मुक्ति पायी,फिर नए सिरे से शुरू होंगे अनवरत पाप!(३)पिता जी ने कहा थाबेटा, सत्य के मार्ग पर चलना,मैं चलापरन्तु फिसलन बहुत थी... [पूरी पोस्ट]
writer nilesh mathur
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[15 Mar 2010 09:06 AM]

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