अक्स

Khyalat इक अक्स सा अक्सर जेहन में उभर जाता है फुल खिलते हैं और गुलशन संवर जाता है दास्तानें-मोहब्बत क्या कहें बस नाम उनका है जो दिल से उठता है जुबां पर ठहर जाता है एक बस उसका चेहरा बस गया है निगाहों में वरना तो मंजर आता है और गुज़र जाता है जिसको पाने के लिये मचल... [पूरी पोस्ट]
writer Om Soni
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[15 Mar 2010 08:46 AM]

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