बुदबुदाहट

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग कल सुबह आफिस आते हुए उन्हें देखा. वे सामने से चली आ रही थीं. जब उनपर नज़र पड़ी उस समय वे एक बैंक के एटीएम के ठीक सामने से गुज़र रही थीं. मैंने देखा कि अचानक वे शरमा गईं. मुझे लगा कहीं एटीएम मशीन देखकर तो नहीं शरमा गईं? लेकिन फिर सोचा कि एटीएम मशीन किसी के... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv Kumar Mishra
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[15 Mar 2010 08:05 AM]

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