नज़र मिली तो पूछूँगा इश्क का अंजाम, नज़र झुकाई तो ख़ाली सलाम कर लूंगा: SALEEM KHAN
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साये में शाम कर लूंगा सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूंगानज़र मिली तो पूछूँगा इश्क का अंजाम नज़र झुकाई तो ख़ाली सलाम कर लूंगा जहाँ-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हें मुबारक होरही शिकस्त तो मैं अपने नाम...
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सलीम ख़ान
सलीम ख़ान
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[15 Mar 2010 06:52 AM]



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