सत्तू
मोहन ने चौकीदार से कुछ बात की ,और फिर मेरे रिक्शे के पास आया ।मैं पास की झाड़ी में छिप गया था ,कौन सा डरहै ,मुझे नहीं मालूम ,यह सभी लोगमुझे तलासते रहे ,जहाँ मैं छिपा बैठा था वहीं पे एक थैला पड़ा हुआ था । मैंने उसेध्यान से देखा ,उस में कुछ था ,पर क्या था...
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भंगार
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[15 Mar 2010 03:18 AM]



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