ज़िंदगी का सच

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** क्यों खिले गुल ,इस चमन मेंदे के सुगंध ..फिर क्यों मुरझाए?शमा जली तो रोशनी के लिएपर परवाना क्योंसंग जल के मर जाए?गुनगुन करते भंवरे,क्यों सब पराग पी जाए?क्यों फूल भी हँस के अपनासब कुछ उस पर लुटाए ?झूमती गाती हवाक्यों एक दम शांत हो जाएधीमे धीमे बहते दिन... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

कविता एहसास

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[15 Mar 2010 02:06 AM]

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