शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 6

नुक्कड़ शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 6नियति ने की थी घड़ी जो नियत,कण कण जिसके लिये था सतत .निशि दिन देखते कब से राह,अरुण उदय होता नित ले चाह .चंद्र किरण फिर, लगे चमकने,नभ में तारे, लगें दमकने .महक कब भरेगी फिर से पवन ?आँचल फिर कब खिलेंगे चमन ?उस क्षण को था बेचैन... [पूरी पोस्ट]
writer kavi kulwant

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 6

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[15 Mar 2010 00:55 AM]

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