‘‘गुब्बारे’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

नन्हें सुमन बच्चों को लगते जो प्यारे। वो कहलाते हैं गुब्बारे।।गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बिकते मेलों में।।काले, लाल, बैंगनी, पीले।कुछ हैं हरे, बसन्ती, नीले।।पापा थैली भर कर लाते।जन्म-दिवस पर इन्हें सजाते।।गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बिकते... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[14 Mar 2010 23:21 PM]

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