उल्लासोपरांत पतझड़ का मौसम आपके लिए---------स्वागत कीजिए इसका भी........ललित शर्मा

शिल्पकार के मुख से होली बीत गई अब पतझड़ आ गया है........वातवरण में गर्माहट है.........पेड़ों के पत्ते पीले पड़ रहे हैं........ वृक्ष अपना क्या कल्प कर रहे हैं इस मौसम में पूरण पत्ते छोड़ कर नए धारण कर रहे हैं जैसे कोई अपनी क्या चमकाने कपडे बदल रहा हों....... पलाश के पेड़ों पर... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

कविता

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[14 Mar 2010 22:30 PM]

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