केवल तुम हो ...तुम
तुमअपरिचित थेबुरे नहींभले लगे थेकिन्तुह्रदय में एक भीबुलबुला नहीं फूटाकिदृष्टि उठा कर तुम्हे देख लूंतबना जाने कौन सीकिरण की इंगिततुम्हे मेरे करीबखींच रही थीमेरी पीर से तुम मेंपीर जगा रही थीअबना जाने कौन सी रासतुम्हे खींचती हुईमेरे इतने करीब ले आई हैकि...
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वाणी गीत
अदा
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[14 Mar 2010 22:09 PM]



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