कबीर के श्लोक - १३
कबीर प्रीति इक सिउ कीऐ, आन दुबिधा जाइ॥
भावै लांबे केस करु, भावै घररि मुडाइ॥२५॥ कबीर जी कहते है कि जब तक उस एक परमात्मा से हमारा संबध नही बन जाता, तब तक संसारी परेशानीयों से, मान अपमान से,नही बचा जा सकता। किसी मजहब या मान्यता का दिखावा मात्र कर लेने से उस...
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परमजीत बाली
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[14 Mar 2010 21:33 PM]



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