मैं नया इक गीत लिख दूँ आज मुझ से कह रहा है

गीत कलश जाये रच परछाईयों के पांव में भी जब महावरधूप की अंगनाई में पायल हवा की झनझनायेदोपहर की थाम उंगली सांझ करती नॄत्य हो जबवीथिका में गंध की सारंगियों पर फूल गायेउस घड़ी लगता तुम्हारा चित्र मेरे सामने आमैं नया इक गीत लिख दूँ आज मुझ से कह रहा हैकह रहा परवाज़ दूँ... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
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[14 Mar 2010 21:45 PM]

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