पढ़ने की ललक लेकर गए वे !
पिछले तीन-चार दिनों से वे कोमा में थे। हमें किसी बुरी खबर की आशंका थी,और अंततः कल शाम वो ख़बर मिली ,जिसने हमारे 'पंडितजी '(बचऊ पंडितजी) को भौतिक रूप से हमसे अलग कर दिया !क़रीब छः महीनों से वे अपने प्यारे गाँव को छोड़कर चिकित्सकीय इलाज़ के लिए...
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संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
मेरे अपने
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[14 Mar 2010 19:47 PM]



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