उतर गया था बुखार सारा,पड़े जो जूते तेरी गली में-------(विनोद कुमार पांडेय)
आदरणीय पंकज सुबीर जी द्वारा होली के तरही मुशायरे के लिए दिए गये मिसरे पर आधारित एक मजेदार रचना.सुबह सवेरे जो घर से निकले, खुमारी होली थी सर पे छाई,हज़ार रंगों से रंग चेहरा, तुम्हारे घर को कदम बढ़ाई,यूँ झूमते हम निकल पड़े थे, इब्न-बतूता का गीत गाकर,नज़र न...
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विनोद कुमार पांडेय
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[14 Mar 2010 12:09 PM]



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