दिनों बाद .........

आर्जव चलूं आज दिनॊं बाद लिखूं कुछ ! कॊई कविता ! हेरूं मन को पुरूं गेहूं के टूण –सी छोटी गैरजरूरी बातों के टूटॆ धागे ! शब्दों को धोऊं, पॊछूं बांधू उनकॊ धागे में भावॊं के जुलहे की पूंछ में टांकू उसे छोड़ू उसे भागे वह द्वारे द्वारे फूले फूले नदी किनारे तीरे तीरे... [पूरी पोस्ट]
writer Aarjav

कविता

views
20
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[14 Mar 2010 11:03 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix