बस माँगे अधिकार

मनोरमा कैसे कैसे लोग से भरा हुआ संसार।बोध नहीं कर्त्तव्य का बस माँगे अधिकार।।कहने को आतुर सभी पर सुनता है कौन।जो कहने के योग्य है हो जाते क्यों मौन।।आँखों से बातें हुईं बहुत सुखद संयोग।मिलते कम संयोग यह जीवन का दुर्योग।।मैं अचरज से देखता बाते कई नवीन।मूरख... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[14 Mar 2010 06:19 AM]

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