एक अभिव्‍यक्ति

दिमाग की हलचल आज पुरानी डायरी में दो पंक्तियां दिख गई... सफाई का काम छोड़कर पहले उन्‍हें ही पोस्‍ट करने बैठा हूं... मेरी पद्य की दो-चार रचनाओं में से एक.... वक्‍त की मौज ने हमको देखा है एक बार अब तो हमीं याद करते हैं बिताए पलों को बार-बार... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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[14 Mar 2010 04:28 AM]

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