माँ का आँचल (II)

Jyotsna Pandey मैंने अपने नन्हे-नन्हेहाथ पैरों को फैलायाऔर अंगड़ाई लेकर मेराकिशोर वय बाहर आया-एक प्रश्न तब भीकुलबुलाता था..........और आज भीसर उठता है----आखिर.........मैंने माँ से पूंछ ही लिया ---"माँ! ये दुनिया कितनी बड़ी है ?"माँ ने मेरा माथा चूमा,सिर को गोद में रख... [पूरी पोस्ट]
writer Jyotsna Pandey
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[14 Mar 2010 00:17 AM]

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