कोई तो जगे

zakhm अँधा हूँ मगरआँख वालों कोआईना बेचता हूँशायद अपना अक्सनज़र आ जायेकिसी कोगूंगा हूँ मगरजुबान वालों कोशब्द बेचता हूँशायद कोई जुबाँके ताले खोलेकोई तो सत्यकी चादर ओढ़ेबहरा हूँ मगरकान वालों कोगीत सुनाता हूँशायद सुनकर किसी का तोखुदा जगेकोई तो वक़्त कीआवाज़ सुने... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
views
20
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
13
[14 Mar 2010 00:18 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix