धोळा में धूळो

काव्य कलश धोळा,कुदरती हाथां उं दियो थको वो सर्टिफिकेट हे जिने ईं दुनियां को कोई भी मनक राजी मन उं कदै लेबो न छावे ,पण जीमणा में खास ब्याईजी-ब्याणजी की खास मनवार के न्यान सबने न-न करर्ता इंने हंसतो-हंसतो लेणाईज पड़े। भारतीय समाज की कतरी पीढ़ियां निकळगी होचबा को तरीको... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[13 Mar 2010 22:01 PM]

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