चांदनी रात में कुछ भीगे ख्यालों की तरह

Firdaus's Diary चांदनी रात में कुछ भीगे ख्यालों की तरहमैंने चाहा है तुम्हें दिन के उजालों की तरहसाथ तेरे जो गुज़ारे थे कभी कुछ लम्हेंमेरी यादों में चमकते हैं मशालों की तरहइक तेरा साथ क्या छूटा हयातभर के लिएमैं भटकती रही बेचैन गज़ालों की तरहफूल तुमने जो कभी मुझको दिए थे... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान

ग़ज़ल

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[13 Mar 2010 22:14 PM]

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