kidhar ho

GAPODI सब पूछते हैं कहाँ हो. कुछ लिखते नहीं. क्या हुआ तबियत कैसी है...पता नहीं. दीप्ति नवल जी की कुछ पंक्तियाँ दिमाग को कुरेद रही हैं. तुम्ही से शुरू तुम्ही पे ख़त्म हर नज़्म मेरी, तुम ख्यालो दूर जाओ तो कुछ और लिखूं.  मेरे और इस पैर के दर्द के बीच का... [पूरी पोस्ट]
writer rajkumar jha
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[13 Mar 2010 19:56 PM]

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