याद आने लगी!!!!

चिंतन मेरे मन का अंगडाई लेती पुरवाई लेकिनयाद तुम्हारी ले आईतन से कोसो दूर लेकिनमन के बहुत करीबआती शरमाती हुई लेकिनकमर बल खाती हुईखामोशी छाने लगी लेकिनदिल शरारत करने लगासंभलने लगे अहसास लेकिनगर्म होने लगी साँसपलके झुकने लगी लेकिनहोंठ थिरकनें लगेमुझ को होश नहीं लेकिनधड़कने... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[13 Mar 2010 15:29 PM]

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