ब्लोग्गिंग के लिए कही चंद पुरानी बातों को फ़िर दुहराया जाए ......

kuch bhi kabhi bhi यूं तो इनमें से कोई भी बात ऐसी नहीं है जिसे पहले नहीं कहा गया हो और सभी ने कभी न कभी इसे अपने अपने अंदाज़ में कहा भी है मगर जाने क्यों जब देखता हूं कि इस ब्लोग शहर में हर रोज़ कई घरौंदे बस रहे हैं नए नए , नए नए कस्बे , नए नए मुहल्ले बस रहे हैं तो फ़िर उन... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार झा
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[13 Mar 2010 13:18 PM]

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