रात

LIFE: AS I SEE IT नीला गगन फिर झुक रहा हैटिमटिमाते तारों के बोझ से धरती कि साँसें सन चुकी हैं सर्द हो चुकी ओस से आज चुप सी है चंचल चांदनी भी झींगुर भी आज कुछ कुछ अनमने हैं ...पत्ते भी आज जाने क्यों तनिक उनींदे हैं फुनगी पे टिक कर सो गयी चंचल हवा भी ..समय ने आज शायद नैन... [पूरी पोस्ट]
writer Paridhi Jha
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[13 Mar 2010 12:31 PM]

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