नैतिकता की बात-हिन्दी व्यंग्य कविता

 हिन्द केसरी-पत्रिका आपस में जाम टकराते हुए लोग नैतिकता की बात करने लग जाते हैं, फिर सुनाते हैं अपनी कमाई के नुस्खे जैसे दो नंबर की कमाई एक नंबर की हो सीना फुलाकर उसकी कहानी सुनाते है।। बहुत अच्छा लगता है आदर्श और नैतिकता की बात करते हुए बशर्त है आदमी स्वयं से छिप सकता... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

अभिव्यक्तिअनुभूतिहिंदी कवितादीपक भारतदीप

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[13 Mar 2010 11:27 AM]

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