कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात
"बेशर्मी का जमाना है"आजकल बेशर्मी का जमाना है,गाली दे कर ताली बजाना है ।वो किस हद तक गिर सकते हैं,हमें भी ये बात आजमाना है ।किसी की मेहरबानी दरकार नहीं,इनायत-ए-खुदा का ख़जाना है ।जाने-अनजाने रिश्ता है उनसे,उसी का तो भरना जुर्माना है ।पूजा-पाठ, गुरु बेकार...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[08 Jul 2009 02:40 AM]



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