कभी तोड़ा कभी छोड़ा
कभी तोड़ा कभी छोड़ा कभी छेड़ा बहाने से हमारा दिल कभी हटता नहीं उनके निशाने से इसी उम्मीद पर देता रहा हूँ हर परीक्षा मैं कभी तो बाज आयेगा मुझे तू आजमाने से खुशी के साथ सह लूंगा सितमगर मैं सितम तेरे अगर आनंद मिलता हो तुझे मुझको...
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jogeshwar garg
ghazal
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[13 Mar 2010 07:06 AM]



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